• HOME
  • Poem & Shayari
GST

GST

GST का देखो खूब मचा है शोर, चली ऐसी हवा, घुस गया हर है छोर। ना समझ आया ये पहेली अ [Read More...]
एक शाम
तू देखती है क्यों चाँद को छुप छुप कर, देख ले खुद को मेरे आँखों में जी भरकर। &nb [Read More...]