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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

भगवान हमारे हर जगह बसते हैं, ओर उन्हें देखने और उनसे मिलने की चाहत हर किसी को रहती है।

ऐसी ही चाहत एक मासूम से बालक को भगवान से मिलने की थी। उसकी एक ही ज़िद थी कि उसे किसी भी हालत में भगवान से मिलना है और इसी ज़िद को पूरा करने के लिए वो एक दिन सुबह सुबह घर से निकल पड़ा।

 

रास्ते में उसने जूस के 5 छोटी छोटी बोतले ले ली। घर से थोड़ी ही दूर जाने के बाद वो एक पार्क के पास रुक जाता है, और वहां पे चबूतरे के पास एक गरीब लाचार बूढी औरत को बैठा देखता है। वो बालक उस औरत के बगल में जाकर बैठ जाता है।

 

कुछ समय बाद छोटा बालक एक जूस के पैकेट को उस बूढी औरत को देता है, वो पैकेट लेकर वो औरत मुस्कुराती है। उसकी मुस्कुराहट को देखकर वो बालक बहुत खुश होता है और फिर कुछ देर के बाद जूस की एक और पैकेट उस औरत को देता है। फिर से वो औरत मुस्कुराती है, और बालक खुश होता है, और ये सिलसिला तबतक चलता है जब तक पैकेट ख़तम न हो गया।

 

सारे पैकेट देने के बाद वो बालक ख़ुशी ख़ुशी घर चला जाता है, उसकी माँ जब उससे इस ख़ुशी का कारण पूछती है तो वो बोलता है कि आज उसने भगवान को देखा। मगर वो ये भी कहता है कि माँ भगवान तो बहुत बूढ़े हो गए है। उधर जब वो बूढी औरत ख़ुशी ख़ुशी अपने घर जाती है और जब उसका बेटा इस खुशी का राज पूछता है तो वो बोलती है की आज उसने भगवान से मुलाकात की, पर उसको ये चिंता थी कि भगवान तो अभी बहुत छोटे है।

 

इस कहानी का सारांश ये है कि अगर आप खुश हो और दूसरों को भी ख़ुशी बांटते हो तो आपको उसमे रब दिखेगा, भगवान दिखेगा।

 

इसीलिए मुस्कुराते रहिए और खुशियां बांटते रहिए।