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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

पता है, अक्सर तुम याद आ जाते हो।

 

हर फूल की नरमी में, सूरज की तपती गर्मी में।

इन सरसराती हवाओं में, बादलों की हर छाओं में।

अक्सर तुम याद आ जाते हो।

 

पहली बारिश की बूंदों में, माटी की सोंधी खुशबू में।

रात की निखरी चांदनी में, सूरज की हर रौशनी में।

अक्सर तुम याद आ जाते हो।

 

पर्वत के ऊंचाइयों में, सागर के गहराईओं में।

किसी सोच के गलियारों में, नदी के हर किनारों में।

अक्सर तुम याद आ जाते हो।

 

मेरे लफ्ज़ के हर एक अल्फ़ाज़ में, किसी गजल के साज़ में।

हर शायर के शायरी में, मेरी वो पुरानी डायरी में।

अक्सर तुम याद आ जाते हो।

 

पता है, अक्सर तुम याद आ जाते हो।