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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

कल का दिन 21 जून, तीसरा अंतरास्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया गया। अच्छा लगता है जब किसी भारतीय संस्कृति को अंतरास्ट्रीय पहचान मिलती है। कल के इस योग दिवस पर देश के विभिन्न स्थानों पर योग शिविर का आयोजन किया गया, सोशल मीडिया पर योग करते हुए फोटो भी डाले गए और बधायाँ भी मिली।

 

जैसा की अक्सर होता है, जब भी कोई इस तरह के मोके आते है उस दिन लोगो में जूनून देखने लायक होता है, पर सो बातों की एक बात ये है कि कुछ दिन में ये उत्साह ख़तम भी हो जाते है। तो जाहिर है योग दिवस में भी यही हुआ, बस एक दिन कि चिंगारी थी।

 

कहते है योग करोगे तो निरोग रहोगे, अरे भैया साल में एक बार योग करके काहे का निरोग। कल के दिन जितने लोगो ने योग किया उसमे से शायद ही 20 या फिर 30 प्रतिशत लोग ही रोज योग करते होंगे। और बाकी लोगो को अपनी समस्याओं को खतम करने से फुर्सत मिले तब न।

 

कल योग दिवस के दिन हमारे प्रधानमंत्रीजी ने बहुत अच्छी बात कही कि योग से मन को स्थिर रखने कि शक्ति मिलती है, और ये बात बिलकुल सही है। पर मेरा माने तो ये सब पर लागू नहीं होता, ये उनके लिए ज्यादा अहमियत रखते है जिनके पेट भरे हों।

 

कभी उस गरीब से भी पूछिए जिसे दो वक़्त की रोटी नसीब नहीं होती, या फिर उस नौजवान से जो रोजगार पाने के लिए दर दर भटकता रहता है।

 

क्या इन जैसे लोगो को मन को स्थिर रखने की शक्ति योग से मिलेगी, नहीं ना। मन को स्थिर रखने की शक्ति तब मिलती है जब आपके आधारभूत जरूरतें पूरी हो।

 

देश की रीढ़ जिनपर टिकी है, उनको मजबूत करने का समय है। अगर ये रीढ़ टूट गई तो योगा से भी नहीं जुड़ेगी।

 

हम खुशनसीब हैं कि आज हमारे देश का योग पूरे विश्व में अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

 

पर साहब, देश के गरीबों के लिए दो वक्त की रोटी, युवाओं को रोजगार, किसानों को फसल का पूरा लाभ मिले जिसे उनके मन को शांति मिल सके तो फिर हम इस दिवस को सफलतापूर्वक मना सकते है।