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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

जून महीने के इस भीषण गर्मी में राजनीति की भी लू चल रही है। एक तरफ जहाँ दलित कार्ड के सहारे राजनीति पार्टियां अपनी रोटियां सेकने में लगे है, वहीँ एक ऐसा इंसान भी है जिसके सपने अधूरे रह गए।

 

जी हाँ, राम नाथ कोविंद और मीरा कुमार को NDA और UPA द्वारा राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित करना और लालकृष्णा आडवाणी को एक बार फिर से बीजेपी से दरकिनार करना शायद कुछ को हजम नहीं हो रहा।

 

कुछ समय पहले तक लालकृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति पद के लिए रेस में माना जा रहा था। आडवाणी का सपना पहले पीएम बनने का था, फिर देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति बनने का। ये सिर्फ उनका ही नहीं बीजेपी के सत्ता में आने के बाद ऐसा लग भी रहा था कि अगले राष्ट्रपति आडवानी ही हो सकते हैं। लेकिन रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाकर एनडीए ने आडवाणी समर्थकों के मंसूबे पर पानी फेर दिया।

 

एक समय अटल और आडवाणी जी का था, बीजेपी के लिए दोनों नेता परचम लहराया करते थे। इसमें कोई शक नही की बीजेपी को शिखर तक पहुंचाने में अटल और आडवाणी का बहुत योगदान है। अटल और आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी के बहुत से नेता आगे बढ़े हैं। बीजेपी के अधिकांश नेताओं के भविष्य सवांरने की बात करें तो आडवाणी ने एक गुरू की भूमिका निभाई है, इनमें से एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी है।

 

लेकिन ये राजनीति है साहब, इसमें हरपल कुछ न कुछ बदलता रहता है। वक्त भी क्या चीज है अपना कमाल दिखा ही देता है।