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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

खुद को सताते है, खुद ही को मनाते है,

एक छोटे बच्चे की तरह,

उम्मीदों को खिलौना बना उसी में खो जाते है,

एक छोटे बच्चे की तरह।

 

खुद को गिराते है, खुद ही को सँभालते है,

एक छोटे बच्चे की तरह,

फिर सारे दर्द भूल यूँ खिलखिलाते है,

एक छोटे बच्चे की तरह।

 

खुद को समझाते है और खुश हो जाते है,

एक छोटे बच्चे की तरह,

ना कोई गुजारिश और ना सिफारिस करते है,

एक छोटे बच्चे की तरह।

 

खुद को खामोश रख, खुद को ही बहलाते है,

एक छोटे बच्चे की तरह,

अपनों की तलाश में रास्ते भटक जाते है,

एक छोटे बच्चे की तरह।