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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

आज सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वाला राजद्रोह लगता है। उसके लिए वह देशद्रोह कभी नहीं है जहां बड़ी-बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों को कौड़ियों के दाम बेच दिया जाता है, उनके लिए यह बात संविधान के खिलाफ नहीं है जहां लोकतंत्र के मंदिर में बैठकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है अश्लील वीडियो देखा जाता है । उसके लिए वह भी देशद्रोह नहीं है जो करोड़ो रुपये का घोटाला कर रहा है।

 

असीम त्रिवेदी देश एक जाने माने कार्टूनिस्ट हैं । असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी के बाद ये निरंकुश सरकार ने यह पूरी तरह से सिद्ध कर दिया है कि वह अपने खिलाफ किसी भी विरोध को बर्दाश्त नहीं कर सकती, भले ही संविधान ने लोगों को अभियक्ति के साथ-साथ कई तरह के अधिकार दिए हों लेकिन जहां सरकार की अनुमति नहीं है वहां संविधान भी कुछ नहीं कर सकता ।
जब जब लोगो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बोला है, ये निरंकुश सरकार ने उसे गिरफ्तार किया है, चाहे वो बाबा रामदेव हो या अरविंदजी ।

 

मुंबई में हुए अन्ना के आदोलन के दौरान कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी ने एक कार्टून बनाया था। इस कार्टून में राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह में मौजूद तीन सिंहों की जगह भेड़िए का सिर और ‘सत्यमेव जयते’ की जगह ‘भ्रष्टमेव जयते’ लिखा गया । पुलिस ने असीम के खिलाफ राजद्रोह के अलावा आईटी एक्ट, राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न एक्ट और साइबर क्राइम एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया है ।

 

जिस तरह से लोगों ने सरकार की गलत नीतियों और भ्रष्ट आचरण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सोशल मीडिया को एक महत्वपूर्ण जरिया बनाया है, इससे सरकार हर समय ताक में रहती है कि इस जरिये को कैसे नेस्तनाबूद किया जाए । दरअसल यही एक जरिया है जहां लोग एक साथ सरकार और राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ खड़े दिखाई देते हैं। कुछ तस्वीरे और कंटेट डालकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते है ।
अपने खिलाफ हो रहे विरोध पर वह सोशल मीडिया को ही जिम्मेदार ठहराती हैं इसलिए चाहे आपत्तिजनक सामग्री के बहाने या फिर असम दंगे के बाद हो रहे पलायन पर सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की बात करने लगती है ।

 

अब तो सरकार के खिलाफ बोलने का मतलब ये है कि  हम देशद्रोही हैं।