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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

शाम हो गई, उतर लिए ऑफिस की सीढ़ियां,

बीत गया ये दिन, और जोड़ी है हमने यादों की कड़ियाँ,

ऑफिस से घर को जोड़ती चौड़ी और सँकरी सड़क,

सड़क के दोनों किनारे छितराया जीवन,

मौन-बतकही, प्यार-नफरत, खुशी और गम, 

सबकी सुध लेते हुए बेसुध से हैं हम, 

डूब गया सूरज हो गयी साँझ, आगे है सपनों वाली रात,

कल फिर होगा एक नया सवेरा और होगी नई बात।