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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

रमेश दबे पाँव जैसे ही घर से बाहर निकला रास्ते में खड़े एक पुलिस वाले ने उसको डांटना शुरू कर दिया। बोला— तुम लोग बाज नहीं आओगे, जब पता है कि लॉकडाउन में घर से बाहर नहीं निकलना है तब भी बार-बार बाहर निकलते हो, लगता है ऐसे नहीं मानोगे।

रमेश हाथ जोड़ते हुए घर के अंदर आ गया और बीबी से बोला- आजकल पुलिस वालों से बड़ा खतरा हो गया है गली-गली में बैठे हुए हैं।
तो बाहर जाने की जरूरत क्या है? जब पता है कि कोरोना की बीमारी फैली हुई है तो ऐसे में खतरा मोल लेने में समझदारी नहीं— बीबी ने बात काटते हुए कहा।

रमेश नाराज होते हुए बोला— अरे इतने दिनों से घर में बैठे बैठे बोर हो रहा था तो सोचा जरा यार दोस्तों से मिल आऊं, पर क्या पता था की पुलिस गेट के बाहर ही खड़ी है?

चलो फिर से देखता हूं शायद वह पुलिस वाला चला गया हो। रमेश धीरे से गेट के बाहर झांकने लगा वहां पुलिस वाले को ना देख कर बड़ा खुश हुआ और छुपते-छुपाते अपने दोस्त सुखिया के घर पहुंच गया लेकिन सुखिया ने बाहर आने से मना कर दिया।

सुखिया बोला— माफ करना रमेश भाई मैं तो इस समय लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कर रहा हूं तुम भी पालन करो और घर लौट जाओ इसी में देश की भलाई है। दोस्त की बात सुनकर रमेश बोला— ठीक है तुम डर कर बैठे रहो मैं हरिया के यहां जा रहा हूं। यह कहते हुए वह गुस्से में आगे बढ़ गया।

अचानक से रास्ते में मोटरसाइकिल पर उसे एक अजनबी दिखा जो उसी तरफ जा रहा था, रमेश के कहने पर उसने लिफ्ट दे दी और दूसरे मोहल्ले तक छोड़ दिया।

रमेश खुशी खुशी धन्यवाद देते हुए बोला— भाई तुम कौन हो और कहां जा रहे हो?

अजनबी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया मुझे नहीं पहचाना— मैं कोरोना हूं तुम जैसे लोगों के लिए ही बाहर घूमता रहता हूं।

तब से रमेश अस्पताल में है।