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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

आखिरकार कसाब को फांसी हो गई, 29 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। मुंबई हमले के एकमात्र दोषी आतंकी अजमल कसाब को मुंबई के आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट करने के बाद बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे फांसी दे दी गई। अजमल आमिर कसाब को फांसी देने की पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया था। हालांकि आठ नवंबर को ही यह तय हो गया था कि कसाब को कब और कहां फांसी दी जाएगी, उसको बेहद गोपनीय तरीके से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट किया गया था। इस पूरे ऑपरेशन को ऑपरेशन एक्स का नाम दिया गया था।

 

कसाब को जेल की सलाखों के पीछे रखने में सरकार करीब पचास करोड़ रुपये का खर्च कर चुकी थी, लेकिन उसकी फांसी पर केवल पचास रुपये का ही खर्च हुआ। ऐसा हम नहीं बल्कि हमारे देश का कानून कहता है जिसके मुताबिक किसी अपराधी को फासी देने के लिए बजट में केवल पचास ही रुपये का ही प्रावधान है।


अजमल आमिर कसाब को फांसी देने के बाद पुणे की यरवडा जेल में ही दफना दिया गया है। उसको दफनाने के लिए कहीं भी जगह न मिलने के बाद यह फैसला लिया गया, क्योंकि कसाब को दफनाने के लिए पुणे के सभी कब्रिस्तानों ने जगह देने के लिए मना कर दिया था, और पकिस्तान ने भी इसके शव को लेने से इनकार कर दिया था।

 

पर अब मेरा सवाल यह है कि क्या आपके विचार से क्या ये सही है कि इस आतंकवादी को भारत के पवित्र भूमि में दफनाया गया ?? मेरे बिचार से कसाब को भी लादेन की ही तरह समुद्र में फेंक देना चाहिए था और दुनिया को दिखा देना चाहिए कि हम भी आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते है।