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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

दो लब्ज़ो में ढूंढ रहा हूँ अपनी वो दास्तां,
बैठा अकेले सोच रहा हूँ पुराने दिन बार-बार।

एक-एक पल जी रहा हूँ अबतक यादों में,
जाया न करो वक्त तू किसी की तलाश में,
अब मंडराता रहता हूँ गुमनाम मंज़िल की तलाश में।