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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

छा जाए अँधेरा जब चारों ओर,
तब टिमटिमाता रहूँ मैं जुगनू बनकर।

ऐ चाँद कल देखा अटारी से तुझको,
जलवे तो तेरे ही हैं,
यूँ तो सूरज में है तेज और चमक ज्यादा,
पर प्यार की बातें तुझमे ही है।

तेरे सफ़ेद रौशनी के आँचल में खो जाऊं,
दुआ मांगता है तेरे ही दर पर,
नहीं चाहिए तपिश सूरज की,
है चाँद तू ही है मूरत शीतलता की।