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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

मैं और मेरी कविता, हो जैसी नदी की निर्मल धारा।
मन मंदिर में समाई जैसे मेरे जीवन की धारा।

तेरे यादों के सागर में ऐसे डूबा रहता हूँ,
जैसे तुम मदिरा और मैं प्याला।

पन्नो में लिखे अल्फ़ाज़, मेरे जिंदगी के अरमान है।
मेरी मंज़िल मेरी कविता मेरे सपनो की जान है।

लफ्ज़ को फूल बनाना तो करिश्मा है मुझमे,
हो न हो कोई तो है मेरे दिल के फ़साने मे।