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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

बात उस समय की है जब 1 रूपये में भी समोसे मिल जाया करता था। आनंदनगर में सोनवीर का परिवार गुप्ताजी के पडोसी हुआ करते थे। सोनवीर और गुप्ताजी की बेटी सोनम गुप्ता साथ में स्कूल जाया करते थे। सोनम को चॉकलेट से बहुत प्यार था और इसी कारण से उसके पास हमेशा छूटे पैसे हुआ करता था, जैसे 10 या 50 के, और जब उसके पास बड़े नोट जैसे 100 या 500 के होते थे तो वो सोनवीर से उसका छुट्टा करवाती थी। सोनवीर किसी भी तरह से उसका छुट्टा करवा के लाता था।

 

और इस तरह सोनम की आदत सी हो गई थी कि जब भी उसे बड़े नोट मिलते वो सोनवीर को छुट्टे करवाने को दे देती थी। और फिर दोनों कि दोस्ती उम्र के साथ साथ प्यार में बदल गई, पर सोनम की वो छुट्टे करवाने की आदत नहीं बदली।

 

फिर इन दिनों अचानक से हमारी सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का फैसला किया, ये बात सुनकर सोनम बहुत घबरा गई और उसने सारे बड़े नोट सोनवीर को देकर बोली की सारे नोट के छुट्टे करवा के ला दे।

 

पर इस समय सोनवीर को कहीं से भी छुट्टे नहीं मिले, वो 2 दिन लगातार बैंक के बाहर खड़ा रहा पैर कोई बात नहीं बनी।

 

इधर सोनम को बहुत गुस्सा आ रहा था कि सोनवीर ने उसे छुट्टे करवा के नहीं दिए, पर एक बनिये के लड़के ने उसकी मदद की और छुट्टे मिलने के कारण सोनम का दिल उस बनिये के लड़के पे आ गया और वो उससे प्यार कर बैठी।

 

जब सोनवीर को इस बात का पता चला तो उसने 10 के नोट पे लिखा "सोनम गुप्ता बेवफा है" और फिर उस नोट के बारे में सारे जहाँ को पता चल गया।

तो ये थी सोनम गुप्ता की बेवफाई की कहानी।

 

Note: इस कहानी के सभी घटना और पात्र काल्पनिक है, और इसका वास्तविक जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं है।