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Suraj Kumar Goel

Suraj Kumar Goel

ये शाम अकेली सी, ये रात है तन्हा,

चाँद को ढूंढूं मैं, बेचैन है हर लम्हा।

 

बह रही हवा ख़ामोशी से, छू सकूँ जो इसे,

आहट तेरी बातों का, ठहर सा गया समां।

 

खामोश से मौसम में, कोई साज नया गूंजा,

हर याद सितारों सी, हर शय में तेरा मजमा।